डॉ. नारायण यादव का जन्म 29 जुलाई 1993 को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के ग्राम अहिरौली मिश्र में सावन माह की पावन नागपंचमी के दिन हुआ। धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में जन्म लेने के कारण बचपन से ही उनके व्यक्तित्व में आध्यात्मिकता, संस्कार और सेवा भाव की गहरी छाप रही।
उनके पिता श्री सुदर्शन यादव एक परिश्रमी, अनुशासित और सामाजिक मूल्यों से जुड़े व्यक्ति हैं, जिन्होंने उन्हें सत्यनिष्ठा और संघर्षशीलता का मार्ग सिखाया। उनकी माता श्रीमती संपाती देवी ने स्नेह, त्याग और आध्यात्मिक संस्कारों से उनके जीवन की नींव को मजबूत किया। परिवार से मिले इन मूल्यों ने उनके व्यक्तित्व को संतुलित, संवेदनशील और लक्ष्य-केन्द्रित बनाया।
ग्रामीण परिवेश में प्रारंभिक जीवन ने उन्हें कठिनाइयों का सामना करना सिखाया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी सोच को सीमित नहीं होने दिया। वे मानते रहे कि “परिस्थितियाँ नहीं, विचार ही भविष्य गढ़ते हैं।”
उनकी चिंतन यात्रा का सार उनकी प्रेरणादायक पुस्तक Think Big, Grow Rich Today में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। इस पुस्तक में आत्मविकास, लक्ष्य-निर्धारण, सकारात्मक सोच, अनुशासन, आदतों की शक्ति और नेतृत्व जैसे विषयों को सरल और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
डॉ. नारायण यादव वर्तमान में अखिल भारतीय कौशल व्यावसायिक अध्ययन परिषद के प्रबंध निदेशक के रूप में कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में परिषद कौशल आधारित शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और युवाओं के करियर मार्गदर्शन के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही है।
उनका उद्देश्य है:
शिक्षा को रोजगारपरक बनाना
युवाओं को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना
संस्थानों के साथ शैक्षिक साझेदारी स्थापित करना
कौशल प्रमाणन कार्यक्रमों का विस्तार करना
डॉ. नारायण यादव की आध्यात्मिक सोच पर डा. सौरभ पाण्डेय के मौनानुभूति दर्शन का प्रभाव रहा है। वे धरा धाम इंटरनेशनल की सेवा, समरसता और ध्यान आधारित विचारधारा को आत्मसात करते हैं।
उनका विश्वास है:
“सच्ची समृद्धि बाहरी उपलब्धियों में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और सेवा में निहित है।”
डॉ. नारायण यादव का पारिवारिक जीवन भी उतना ही संतुलित और मूल्यनिष्ठ है जितना उनका सार्वजनिक जीवन। उनकी धर्मपत्नी श्रीमती राधा देवी उनके जीवन की प्रेरणा और सहयोगी शक्ति हैं।
उनकी दो बेटियाँ – सरस्वती और पार्वती – उनके जीवन का गौरव और भविष्य की आशा हैं। वे मानते हैं कि परिवार व्यक्ति की ऊर्जा का केंद्र होता है, और मजबूत पारिवारिक मूल्यों से ही सशक्त समाज का निर्माण संभव है।
उनका जीवन संदेश “मैं” से “हम” की यात्रा है। वे मानते हैं कि व्यक्तिगत सफलता तभी पूर्ण है जब वह समाज के उत्थान में योगदान दे।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर शिक्षा, कौशल विकास और प्रेरक लेखन के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सकारात्मक सोच से कोई भी व्यक्ति अपनी नियति बदल सकता है।
29 जुलाई 1993 को नागपंचमी के पावन दिन जन्मे डॉ. नारायण यादव आज शिक्षा, कौशल विकास और प्रेरक चिंतन के क्षेत्र में एक समर्पित और सक्रिय व्यक्तित्व के रूप में स्थापित हैं।
उनकी जीवन यात्रा हमें यह सिखाती है:
“बड़ा सोचो, संयमित रहो, निरंतर सीखो और समाज के लिए कार्य करो — यही सच्ची सफलता का मार्ग है।”